रैगिंग विरोधी

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रैगिंग विरोधी

रैगिंग :किसी भी प्रकार के विश्रिंखल आचरण, जो या तो मौखिक अथवा लिखित या कार्य द्वारा किया जाता है, जो किसी अन्य छात्रों को छेड़छाड़, अशिष्टता के साथ व्यवहार से प्रभावित करनेवाले हो, किसी उपद्रवी अथवा अनुशासनात्मक गतिविधियों में शामिल होना, जिससे नाराजगी, कठिनाई या मनोवैज्ञानिक क्षति या एक नवसिखुआ या कनिष्ठ छात्र में डर या आशंका पैदा हो या छात्रों को किसी भी कार्य करने या कुछ ऐसा करने का अनुरोध करना जो इस तरह के सामान्य पाठ्यक्रम में नहीं होगा और जिसमें शर्म अथवा शर्मिंदगी अनुभव करने का प्रभाव हो जिससे कि नवागतों अथवा किसी कनिष्ठ छात्रों के शरीर अथवा मन पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है”।

रैगिंग विरोधी प्रकोष्ठ

      1 डीन, छात्र कल्याण अध्यक्ष [संपर्क विवरण
      2 प्रोवोस्ट सदस्य [संपर्क विवरण]
      3 सभी छात्रावासों के वार्डन सदस्य [संपर्क विवरण]
4 सभी भवनों के भवन संयोजक सदस्य [संपर्क विवरण]

रैगिंग से संबन्धित किसी घटनाओं की सूचना देने के लिए कुलपति और कुलसचिव से संपर्क करें ।

संपर्क विवरण

1.कुलपति का कार्यालय : 251067 / 251073
2.कुलसचिव का कार्यालय : 251403 / 251076

किसी छात्र जिसे छात्रावास में अथवा विभागों में अथवा विश्वविद्यालय भवनों के अंदर रैगिंग किया गया है अथवा जिसने किसी दूसरे को रैगिंग होते हुए देखा है, उपर्युक्त सदस्यों में से किसी एक को अपनी शिकायत प्रस्तुत कर सकता/सकती है, जो तत्काल प्रभाव से डीन, छात्र कल्याण को सूचित कर सकता है। इस तरह की शिकायत मिलने पर छात्र कल्याण डीन तीन (3) दिनों के भीतर प्रकोष्ठ की एक बैठक आयोजित करेंगे। रैंगिंग विरोधी प्रकोष्ठ शिकायतों की जांच करेगी। अगर शिकायत सही साबित होगा है और अपराधी की पहचान होती है तो प्रकोष्ठ उच्चतम न्यायालय के नियमों के अनुसार कुलपति को उपयुक्त सिफ़ारिश कर सकते हैं।

प्रकोष्ठ समय-समय पर रैगिंग विरोधी नियमों के बारे में छात्रों को जागरूक करेगा और अगर वे रैगिंग में शामिल होते है तो उसके परिणामों के बारे में सूचित करते हुए छात्रावासों तथा विभागों की सूचनापट पर प्रदर्शित करेगा।

रैगिंग के रूप में माने जानेवाली गतिविधियां :

  • बोले या लिखे गए शब्दों द्वारा किए गए कोई भी आचरण या कार्य जिसमें नवागतों अथवा किसी अन्य छात्रों को छेड़छाड़ अथवा अशिष्टता पूर्ण व्यवहार करना अथवा कठोर आचरण करने का प्रभाव हो।
  • जबरन वित्तीय वसूली अथवा जबर्दस्ती व्यय करने का कार्य
  • शारीरिक शोषण
  • गुंडागर्दी/अनुशासित गतिविधियां, जो किसी छात्र में झुंझलाहट, कठिनाई, शारीरिक/मानसिक हानी या दर या आशंका का कारण हो सकता है या होने की संभावना बन सकता है।
  • किसी छात्र को ऐसा कार्य करने के लिए मजबूर करना, जो शर्म की भवन पैदा करता है, पीड़ा या शर्मिंदगी उसकी शारीरिक या मानसिक स्थिति को प्रभावित करता है।
  • किसी भी ऐसा कार्य जो छात्र की नियमित शैक्षिक गतिविधियों को रोकता है/परेशान करता है/बाधित करता है।
  • माखिक शब्दों, ईमेल, पोस्ट, सार्वजनिक अपमान द्वारा किए गए कोई भी कार्य या दुरुपयोग जिसमें विकृत खुशी भी शामिल है, जिससे किसी नवागत छात्र अथवा किसी अन्य छात्र को असुविधा में सक्रिय रूप से भाग लेने से विकृत या दुखद भावना पैदा होगा।  
  • किसी इरादे से अथवा बिना किसी इरादे से शक्ति प्रदर्शन, अधिकार अथवा श्रेष्ठता दिखाने के उद्देश्य से कोई भी ऐसा कार्य जो मानसिक, शारीरिक और आत्मविश्वास को प्रभावित करता है।

श्री आर.के. राघवन समिति की सिफ़ारिशें :

मौखिक रैगिंग : जब किसी वरिष्ठ द्वारा कनिष्ठ छात्रों को उसके अस्वीकार्य व्यक्तिगत प्रश्नों के जवाब देने, नृत्य, गायन आदि करने के लिए मजबूर करते हुए मानसिक उत्पीड़न, असुविधा प्रदान करता है, तो उसे कनिष्ठ को रैगिंग करना कहा जाता है। इसकी परिधि में “साइबर रैगिंग” भी शामिल है। सजा : 1 वर्ष का कारावास अथवा जुर्माना।

गंभीर मौखिक रैगिंग : जहां मानसिक उत्पीड़न, असुविधा इस प्रकार के हो कि कनिष्ठ छात्रों को कॉलेज छोड़ने के लिए मजबूर करता है। सजा : जुर्माना सहित 7 वर्ष का कारावास

शारीरिक रैगिंग : वरिष्ठ छात्र द्वारा कनिष्ठ पर किए गए ऐसे कार्य जो कनिष्ठ को शारीरिक चोट पहुंचाता है। जैसे, कनिष्ठ को पीटना, किसी वस्तु से मारना आदि। सजा : 7 वर्ष के सश्रम कारावास और जुर्माना

यौन रैगिंग : जहां वरिष्ठ छात्र कनिष्ठ छात्रों को कुछ ऐसा करने के लिए कहते हैं, जिससे कनिष्ठ छात्रों की यौन प्रतिष्ठा को नुकसान फूंचता है। सजा : 7 वर्ष के सश्रम कारावास और जुर्माना

उद्देश्य :

सिक्किम विश्वविद्यालय में रैगिंग के खतरे को रोकने के लिए

रैगिंग विरोधी नीति - सिक्किम विश्वविद्यालय के परिसर और इसके सम्बद्ध संस्थानों में रैगिंग कठोरता से प्रतिबंधित है। यदि कोई ऐसी गतिविधियों में शामिल हो जाता है, तो रैगिंग की सीमा के बावजूद सख्त कार्रवाई की जाएगी

  • विश्वविद्यालय/महाविद्यालयों में रैगिंग को रोकना और साथ-ही-साथ रैगिंग में शामिल होनेवाले लोगों के लिए उचित कार्रवाई करना,
  • कानून द्वारा रैगिंग को प्रतिबंधित करते हुए और सर्वोच्च न्यायालय, यूजीसी और सिक्किम विश्वविद्यालय के नियमों के प्रावधानों का पालन करते हुए इसे रोकने के लिए संस्था से रैगिंग के सभी रूपों को बाहर निकालना और  

  • दोषी पाये गए लोगों के लिए उचित दंड निर्धारित करना।

रैगिंग विरोधी समिति के कार्य :

  1. रैगिंग विरोधी पर संबन्धित प्रार्थी से निर्धारित प्रारूप में वचन लेना।
  2. रैगिंग विरोधी पर संस्थानों के प्रमुख द्वारा छात्रों और माता-पिता को संबोधित करना।
  3. शैक्षणिक वर्ष की समाप्ति पर जागरूकता पैदा करने के लिए छात्रों के माता-पिता, अभिभावकों को पत्र भेजने की व्यवस्था करना।
  4. सम्बद्ध संस्थानों के साथ संपर्क करना और उनसे आवधिक रिपोर्ट मांगना।
  5. शैक्षणिक वर्ष के अंत में संरक्षकों को शामिल करते हुए निगरानी प्रकोष्ठों (उप-समितियां) का गठन करना।
  6. सख्त सुरक्षा के लिए उपायों का सुझाव देना।
  7. जो संस्थान रैगिंग को प्रभावी ढंग से नहीं रोक सकता है, उन संस्थानों की संबद्धता वापस लेने की सिफ़ारिश करना।

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